
Bhandara News सागर भांडारकर . जिले के भंडारा-पवनी निर्वाचन क्षेत्र के निर्माण के बाद से लेकर गत चुनाव तक क्षेत्र के मतदाताओं ने हर पांच साल बाद अपना प्रतिनिधि बदलकर नए नेता का ही चुनाव किया है। फलस्वरूप क्षेत्र में हर पांच साल में विधायक बदलते रहे।
गौरतलब है, वर्ष 2009 तक अड्याल–पवनी अलग विधानसभा क्षेत्र था। तत्पश्चात भंडारा–पवनी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र का निर्माण हुआ और यह क्षेत्र एससी के लिए आरक्षित किया गया। इसी वजह से वर्ष 2004 से 2009 तक क्षेत्र के विधायक रहे पूर्व राज्यमंत्री नाना पंचबुध्दे दोबारा इस क्षेत्र से चुनाव नहीं लड़ पाए। हालांकि, इस नए विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र की विशेषता यह रही कि यहां की जनता ने हर पांच साल बाद अपना प्रतिनिधि बदल दिया।
वर्ष 2009 में भंडारा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से मुख्य रूप से महाआघाड़ी के राष्ट्रवादी कांग्रेस के प्रत्याशी महेंद्र गडकरी तथा महायुति के शिवसेना प्रत्याशी नरेंद्र भोंडेकर चुनाव मैदान में थे। इस कांटे के मुकाबले में नरेंद्र भोंडेकर विजयी रहे। इसके बाद जब वर्ष 2014 में चुनाव हुए तो मुकाबला भाजपा प्रत्याशी एड. रामचंद्र अवसरे और बहुजन समाज पार्टी की देवांगना गाढवे के बीच था। इस चुनाव में जनता ने एड.अवसरे को विजय की माला पहनाकर विधानसभा में भेजा। इस चुनाव में वर्तमान विधायक भोंडेकर शिवसेना की टिकट पर चुनाव मैदान में थे और तीसरे स्थान पर रहे थे। इसके बाद वर्ष 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अरविंद भालाधरे के रूप में नए चेहरे को मौका देते हुए चुनाव मैदान में उतारा, लेकिन निर्दलीय प्रत्याशी नरेंद्र भोंडेकर ने 1 लाख एक हजार 717 वोट लेकर भाजपा प्रत्याशी भालाधरे को करीब 23 हजार 677 वोटों से पराजित कर दिया। जबकि कांग्रेस-राकांपा आघाड़ी के उम्मीदवार जयदीप जोगेंद्र कवाड़े को 19 हजार 105 वोट मिले।
भंडारा विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं ने फिर एक बाद विधायक बदल दिया। वर्ष 2009 तथा 2019 में विधायक बने नरेंद्र भोंडेकर इस बार महायुति की टिकट पर शिवसेना (शिंदे गुट) से चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में मतदाता उन्हें फिर से चुनते हैं या इस बार भी नए चेहरे को मौका देते हैं इस पर सभी की निगाहें लगी हुई हैं।